एपीएम एकेडमी में विराट कवि सम्मेलन का सफल आयोजन

महाराजगंज।
 एपीएम एकेडमी के प्रांगण में एक भव्य एवं विराट कवि सम्मेलन का सुप्रसिद्ध फेसबुक पेज़ "जज़्बात के भवसागर से" एवं एपीएम एकेडमी, पिपरा लाला, महाराजगंज के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन हुआ। यह दोनों ही संस्थाएं शिक्षा, साहित्य, कला एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को समर्पित है तथा इस हेतु विभिन्न ऑनलाइन एवं मंचीय कार्यक्रमों का आयोजन करती रही हैं। इसी क्रम में "नाइन सैनिटरी नैपकिंस" के सौजन्य से आयोजित इस मंचीय कवि सम्मेलन में अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय कवि एवं कवयित्रियों  ने काव्य पाठ किया।
परंपराओं का निर्वहन करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ मनोज गौतम, विशिष्ट अतिथि राकेश श्रीवास्तव एवं आमंत्रित कवि गण ने दीप प्रज्वलन तथा वीणा वादिनी माता सरस्वती की अर्चना वंदना कर किया। तदोपरांत संस्था के प्रेरणा स्रोत स्व. डॉ आद्य प्रसाद  के चित्र पर माला व पुष्प अर्पित करते हुए उन्हें नमन् व स्मरण किया गया। मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि तथा सभी कवि गणों का माला पहनाकर, स्मृति चिन्ह तथा अंग वस्त्र देकर स्वागत एवं सम्मान किया गया।
तत्पश्चात् संस्था के संस्थापक सदस्य रुपेश कुमार श्रीवास्तव तथा वरिष्ठ नेता हरेंद्र कृष्ण त्रिपाठी के द्वारा मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, कविगण तथा संयोजन समिति के विशेष आग्रह पर कार्यक्रम में पधारे स्वामी राम शंकर उर्फ डिजिटल बाबा एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्वतारोही  नीतीश कुमार सिंह का परिचय कराया गया।
कवि सम्मेलन का आरंभ अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कवि वाराणसी से पधारे पं. भूषण त्यागी की अध्यक्षता में हुआ। अंतर्राष्ट्रीय पटल पर अपनी काव्य प्रतिभा का लोहा मनवा चुके तथा आशु कविता‌ के माध्यम से त्वरित प्रतिक्रिया देने वाले सुप्रसिद्ध कवि राजेश राज ने मंच का संचालन संभाला। सुप्रसिद्ध कवयित्री प्राची राज मां शारदे की वंदना "हंस वाहिनी मां मुझको वर दे..." से कवि सम्मेलन का आगाज किया। मशहूर शायर इं. मिन्नत गोरखपुरी ने हिंदू मुस्लिम एकता और बेटियों के महत्व को रेखांकित करते हुए जब अपने असरदार शेर पढ़े तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद गोरखपुर शहर की प्रसिद्ध समाजसेवी एवं वरिष्ठ कवयित्री सुधा मोदी ने शहीदों के बलिदान एवं कार्तिक पूर्णिमा देव दीपावली को अपने काव्य पाठ में समायोजित करते हुए श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। "जला के आरती के थाल पर रण का टीका.. और "तेरी मिट्टी मेरी मिट्टी..." आदि कविताओं के माध्यम से पूरे माहौल को देश के प्रति भक्तिमय कर दिया। अगले क्रम में दिल्ली से पधारे डॉ कुमार नवनीत जहां एक तरफ अपने खड़ी बोली के सुंदर गीतों "तुम नहीं आए..." एवं "ए दरिया तू प्यासा क्यों है..." के सस्वर पाठ से श्रोताओं का दिल जीता वहींं दूसरी तरफ भोजपुरी में भी अपनी समान पकड़ का परिचय कराया। भोजपुरी के सवैया व गीतों "का,  का धरब रेहन पर के आगे छुड़वाई..." व "बबुआ पढ़ लिख क मनई बयान बनिह..." की काव्य गंगा में सभी श्रोताओं को डुबकी लगाकर भीतर तक भिगो दिया। प्रसिद्ध नेत्री एवं कवयित्री चेतना पांडेय ने एक से एक शेर पढ़े और दर्शकों की वाह वाही बटोरी। इनके काव्य की कुछ पंक्तियां "प्रश्न कैसे भी हो जवाब मिट्टी में रखो..." तथा "पिया तो तिरंगा कफ़न लेकर लौटे..." श्रोता एवं कवि गणों को प्रभावित करने में सफल रही। बहराइच से आए हुए भालचंद्र त्रिपाठी की "तुम सलीके से कह गए होते हम भी हर बात कह गए होते..." व "उन पर कुर्बान हो गए क्या इतने नादान हो गए क्या..." जैसी सशक्त रचनाओं ने श्रोताओं को बांध दिया। कार्यक्रम की संयोजिका स्मिता श्रीवास्तव ने झांसी की रानी की जयंती को रेखांकित करते हुए अपना काव्य पाठ आरंभ किया। इसके बाद युवा वर्ग की आग्रह का सम्मान करते हुए "उनके हाथों की लिखी चिट्ठी संभाले रखा..." व "अपने हुनर को ले कर कहां जाइएगा आप..." सुनाकर खूब तालियां अर्जित की। भोजपुरी के सशक्त हस्ताक्षर धर्म देव सिंह "अतुर" ने अपनी कालजई भोजपुरी व्यंग गीत "तोहार मेहरबानी जीयत बानी..." एवं अन्य गीत सुना कर दिल जीत लिया। प्राची राज ने मधुर स्वर में गजल "वो भी कैसा हिसाब रखते हैं मेरे हिस्से का ख्वाब रखते हैं..सुनाया। 
अपनी गरिमामई उपस्थिति के साथ स्वामी राम शंकर उर्फ डिजिटल बाबा ने स्वरचित पंक्तियों "बैठकर मुस्कुराइए हमारी तरह..." से उपस्थित सभी दर्शकों को अनवरत करतल ध्वनि करने के लिए मजबूर कर दिया। मुख्य अतिथि ने भी अपने स्वरचित पंक्तियों "मैं भी राजनीति में आना चाहता हूं..." सुना कर सामाजिक (राजनीतिक) प्रतिद्वंदिता पर कटाक्ष किया। साथ ही विशिष्ट अतिथि ने अपने आशीर्वचन के साथ ग्रामीण क्षेत्र में हुए इस भव्य आयोजन की भरपूर सराहना की। विशेष उपस्थिति दर्ज कराने वालों में पर्वतारोही  नीतीश सिंह ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए अपनी आगामी योजनाओं का भी जिक्र किया। संचालक राजेश राज ने पूरे कवि सम्मेलन के दौरान अपने आशु प्रतिक्रियाओं से श्रोताओं को ना केवल बांधे रखा अपितु काव्य रचना की हर विधा पर अपनी मजबूत पकड़ को साबित किया। एक और जहां उन्होंने "समझो शाम हुई..." के माध्यम से जीवन यात्रा का वर्णन किया वही हास्य व्यंग कविता सुनाकर खूब हंसाया। अपने अध्यक्षीय काव्य पाठ में पंडित भूषण त्यागी ने "है स्वयं से शिकायत यही रात दिन..." आलोक नहीं मरने वाला...." आदि अनेक रचनाओं को अपनी ओजस्वी वाणी में सुना कर कवि सम्मेलन को अंतिम चरण तक ऊर्जावान बनाए रखा। गहराती और बढ़ती ठंड के बावजूद कवियों के शानदार रचना श्रोताओं की उपस्थिति और फरमाइशों ने कवि सम्मेलन की ऊष्मा में प्रारंभ से अंत तक कोई कमी नहीं आने दी। 
इसके बाद उपस्थित कवियों को उपहार देकर सम्मानित किया गया। अंत में एपीएम एकेडमी के विशेषज्ञ सदस्य (कला एवं संस्कृति) एवं जज़्बात के भवसागर से के संयोजक  हरी प्रसाद सिंह ने आभार ज्ञापन किया। इस अवसर पर सुंदर मंच सज्जा में सबसे महत्वपूर्ण योगदान कला साधक सुरेंद्र प्रजापति एवं उनकी टीम का रहा उनके द्वारा बनाई गई चित्ताकर्षक एवं कलात्मक रंगोली ने हर किसी का ध्यान आकृष्ट किया। कार्यक्रम की आयोजन समिति ने प्रायोजक मे. नाइन प्राइवेट लिमिटेड, गीडा, गोरखपुर एवं एपीएम एकेडमी महाराजगंज के समस्त स्टाफ तथा ग्राम वासियों का आभार ज्ञापित किया जिनके योगदान से ही इस शानदार कवि सम्मेलन का सफल आयोजन हुआ।





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