क़ुरआन व हदीस की तालीम हर खासो आम के लिए जरूरी है : उलमा-ए-किराम

क़ुरआन व हदीस की तालीम हर खासो आम के लिए जरूरी है : उलमा-ए-किराम
-इलाहीबाग, तुर्कमानपुर व रेती चौक पर जलसा-ए-ग़ौसुलवरा

गोरखपुर। ग़ौसे आज़म हज़रत शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी अलैहिर्रहमां की याद में इलाहीबाग में जलसा-ए-ग़ौसुलवरा हुआ। क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत की गई। नात व मनकबत पेश की गई। 

तकरीर करते हुए मुख्य वक्ता मौलाना मोहम्मद अहमद निज़ामी ने कहा कि आज हम गफ़लत में ज़िंदगी गुजार रहे हैं। अल्लाह की नाफ़रमानी कर रहे हैं, लेकिन अब हमें खुद को ईमान और हक़ पर लाकर पैग़ंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बताए रास्ते पर चलकर दुनिया और आख़िरत दोनों को सुधारने की आवश्यकता है। हमें दीन-ए-इस्लाम के रूहानी पैग़ाम को समझने की पुरजोर कोशिश करनी चाहिए। हम दीन-ए-इस्लाम के उसूलों की पाबन्दी करें। 

विशिष्ट वक्ता मौलाना अली अहमद अशरफ़ी ने कहा कि क़ुरआन-ए-पाक की तालीम हासिल करना जरूरी है। मुसलमानों को चाहिए कि वह अपने बच्चों को क़ुरआन-ए-पाक व हदीस-ए-पाक जरूर पढ़ाएं। क़ुरआन व हदीस पढ़ने और पढ़ाने में बहुत सवाब है। दीन-ए-इस्लाम हमें पाक साफ,भाईचारा और अमन से ज़िंदगी जीने की तालीम देता है ताकि हम दुनिया में एक इज्जतदार इंसान की हैसियत से ज़िंदा रहें और हमारी पाक साफ ज़िंदगी दूसरों के लिए एक मिसाल बने। 

तुर्कमानपुर न्यू मस्जिद के निकट जलसा-ए-ग़ौसुलवरा में मुख्य वक्ता मौलाना मोहम्मद असलम रज़वी ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम सिर्फ इबादत का ही नाम नहीं है, बल्कि लोगो का हक़ अदा करने और हर काम को अच्छी नीयत और अपने पैदा करने वाले अल्लाह को खुश करने के लिए करना यह भी दीन-ए-इस्लाम का हिस्सा है। हम कभी किसी का हक़ न मारे और यदि किसी का हक़ मारा है तो उसे लौटा दें। ग़रीबों को अपनी खुशियों में शामिल करें। हमारी कमाई का एक हिस्सा ग़रीब बेसहारा लोगों का हक़ है। जिसके लिए ज्यादा से ज्यादा सदका व ज़कात किया जाना चाहिए। अल्लाह बड़ा रहम करने वाला है, उसकी रहमतों से कभी मायूस नहीं होना चाहिए, उसकी रहमत की हमेशा उम्मीद लगाए ज़िंदगी गुजारनी चाहिए।

विशिष्ट वक्ता मुफ़्ती मोहम्मद अज़हर शम्सी (नायब काजी) ने कहा कि मुसलमानों को दीन-ए-इस्लाम के बताए रास्ते पर चलना चाहिए। बुराई को छोड़ना चाहिए। अच्छाई को अपनाना चाहिए। अपने बच्चों को दीनी तालीम के साथ दुनियावी तालीम जरूर दिलानी चाहिए। दीन-ए-इस्लाम में इल्म की बहुत अहमियत है। दिल में खौफे खुदा पैदा कीजिए। पाबंदी के साथ नमाज पढ़ें। शरीअत पर चलें।  

रेती चौक निकट मदीना मस्जिद जलसा-ए-ग़ौसुलवरा हुआ। जिसमें मुख्य वक्ता मौलाना गुलाम ग़ौस अज़हरी ने संबोधित करते हुए कहा कि समाज के युवा आज गलत लाइन में उलझ रहे हैं, लेकिन हमें उन्हें सही रास्तों पर लाकर हक़ इबादत से जोड़ना है। 

अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमन, खुशहाली व तरक्की की दुआ मांगी गई। शीरीनी बांटी गई। जलसे में सूफी निसार अहमद, कारी गुलाम वारिस, सेराज अज़हर, कारी खुर्शीद आलम, इरशाद अहमद, दानिश रज़ा अशरफ़ी, कारी नसीमुल्लाह, कारी नियाज अहमद क़ादरी, कारी नूर मोहम्मद, हाफ़िज़ सलमान, कारी हबीबुल्लाह, नूर मोहम्मद दानिश, अधिवक्ता आज़म खान, रईस अनवर, तामीर अज़ीज़ी, मुफ़्ती मुनव्वरआदि ने शिरकत की।

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